चन्द्रगुप्त मौर्य ।
मै चन्द्रगुप्त मौर्य हूं , तू दुर्धरा सी कन्या । पिता घनानंद है तेरा , में तेरे प्रेम में सौजन्या।
चाणक्य गुरु है मेरे , में उनकी बात ही मानूं। अखंड भारत का सपना मेरा,और कुछ ना जानू।
सेंड्रोकोट्स, एंड्रोकोट्स उपनाम है मेरे l। ६ लाख की सेना ने , जमबूद्वीप पर डाले डेरे।
चाणक्य का उपदेश, अखंड भारत का निर्माता। लेकर संलेखना में अपने प्राणों का दाता l
अखंड भारत का प्रथम सम्राट कहलाता हूं l। चन्द्रगुप्त मौर्य की गाथा, मे आप को सुनाता हू ।

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